सूर्य अष्टोत्तर शतनामावली
श्री सूर्य
परिचय
भगवान सूर्य के 108 पवित्र नामों का संकलन। सूर्य देव समस्त जगत के प्रकाश, ऊर्जा और जीवन के स्रोत हैं। प्रत्येक नाम सूर्य के एक विशेष गुण, तेज या महिमा का वर्णन करता है। इन नामों का श्रद्धापूर्वक जप करने से भक्त को सूर्य कृपा, आरोग्य और यश प्राप्त होता है।
महत्त्व
सूर्य अष्टोत्तर शतनामावली का पाठ सूर्य उपासना का एक प्रमुख अंग है। वैदिक परम्परा में सूर्य को प्रत्यक्ष देवता माना गया है। यह पाठ नेत्र रोग निवारण, आरोग्य प्राप्ति और शत्रु-भय निवारण में विशेष फलदायी माना जाता है।
कब पढ़ें
रविवार, सूर्य संक्रान्ति, मकर संक्रान्ति, रथ सप्तमी, छठ पूजा, या प्रातःकालीन सूर्य पूजा के अवसर पर। सूर्योदय के समय पूर्व दिशा की ओर मुख करके पाठ करना विशेष फलदायी माना जाता है।
लाभ
- • नेत्र रोग और चर्म रोग से मुक्ति
- • आरोग्य, तेज और ओज की प्राप्ति
- • शत्रु-भय और अकाल मृत्यु से रक्षा
- • सूर्य ग्रह दोष का शमन
108 नाम
| # | मंत्र | अर्थ |
|---|---|---|
| 1 | ॐ सूर्याय नमः Sūryāya | परम प्रकाश स्वरूप |
| 2 | ॐ आदित्याय नमः Ādityāya | अदिति के पुत्र |
| 3 | ॐ भास्कराय नमः Bhāskarāya | प्रकाश उत्पन्न करने वाले |
| 4 | ॐ सवित्रे नमः Savitrē | प्रेरणा देने वाले, सृजनकर्ता |
| 5 | ॐ दिनकराय नमः Dinakarāya | दिन बनाने वाले |
| 6 | ॐ प्रभाकराय नमः Prabhākarāya | प्रभा (कान्ति) उत्पन्न करने वाले |
| 7 | ॐ दिवाकराय नमः Divākarāya | दिवस (दिन) को प्रकाशित करने वाले |
| 8 | ॐ रवये नमः Ravayē | ध्वनि और प्रकाश स्वरूप |
| 9 | ॐ भानवे नमः Bhānavē | प्रकाशमान, चमकने वाले |
| 10 | ॐ अर्काय नमः Arkāya | पूजनीय, अर्चना योग्य |
| 11 | ॐ मित्राय नमः Mitrāya | सबके मित्र |
| 12 | ॐ विवस्वते नमः Vivasvatē | अत्यन्त प्रकाशमान |
| 13 | ॐ मार्ताण्डाय नमः Mārtāṇḍāya | मृत अण्ड से उत्पन्न, जीवनदाता |
| 14 | ॐ तपनाय नमः Tapanāya | ताप देने वाले |
| 15 | ॐ अंशुमालिने नमः Aṁśumālinē | किरणों की माला वाले |
| 16 | ॐ हिरण्यगर्भाय नमः Hiraṇyagarbhāya | स्वर्ण गर्भ, ब्रह्माण्ड के बीज |
| 17 | ॐ तमोघ्नाय नमः Tamōghnāya | अन्धकार का नाश करने वाले |
| 18 | ॐ पूष्णे नमः Pūṣṇē | पोषण करने वाले |
| 19 | ॐ विष्णवे नमः Viṣṇavē | सर्वव्यापी |
| 20 | ॐ खगाय नमः Khagāya | आकाश में विचरण करने वाले |
| 21 | ॐ हरिदश्वाय नमः Haridaśvāya | हरे अश्वों वाले |
| 22 | ॐ सप्तसप्तये नमः Saptasaptayē | सात-सात (सप्ताश्व) वाले |
| 23 | ॐ मरीचिमते नमः Marīcimatē | किरणों से युक्त |
| 24 | ॐ तिमिरोन्मथनाय नमः Timirōnmathanāya | अन्धकार को मथने (नष्ट करने) वाले |
| 25 | ॐ शम्भवे नमः Śambhavē | सुख प्रदान करने वाले |
| 26 | ॐ त्वष्ट्रे नमः Tvaṣṭrē | विश्वकर्मा, दिव्य शिल्पी |
| 27 | ॐ अग्नये नमः Agnayē | अग्नि स्वरूप |
| 28 | ॐ वरुणाय नमः Varuṇāya | जल के स्वामी |
| 29 | ॐ इन्द्राय नमः Indrāya | देवराज |
| 30 | ॐ धात्रे नमः Dhātrē | धारण करने वाले, विधाता |
| 31 | ॐ प्रजापतये नमः Prajāpatayē | प्रजाओं के स्वामी |
| 32 | ॐ प्रत्यूषाय नमः Pratyūṣāya | प्रातःकाल, उषा से पूर्व प्रकट होने वाले |
| 33 | ॐ विभावसवे नमः Vibhāvasavē | विशेष प्रकाश वाले |
| 34 | ॐ ग्रहराजाय नमः Graharājāya | ग्रहों के राजा |
| 35 | ॐ ग्रहपतये नमः Grahapatayē | ग्रहों के पति (स्वामी) |
| 36 | ॐ सप्ताश्ववाहनाय नमः Saptāśvavāhanāya | सात अश्वों के रथ वाले |
| 37 | ॐ तीक्ष्णांशवे नमः Tīkṣṇāṁśavē | तीक्ष्ण किरणों वाले |
| 38 | ॐ सहस्रांशवे नमः Sahasrāṁśavē | सहस्र किरणों वाले |
| 39 | ॐ चण्डांशवे नमः Caṇḍāṁśavē | प्रचण्ड किरणों वाले |
| 40 | ॐ द्वादशात्मने नमः Dvādaśātmanē | बारह आत्माओं (आदित्यों) वाले |
| 41 | ॐ लोकचक्षुषे नमः Lōkacakṣuṣē | लोक के नेत्र |
| 42 | ॐ जगच्चक्षुषे नमः Jagaccakṣuṣē | जगत के नेत्र |
| 43 | ॐ कालात्मने नमः Kālātmanē | काल स्वरूप |
| 44 | ॐ कालचक्रप्रवर्तकाय नमः Kālacakrapravartakāya | काल-चक्र को चलाने वाले |
| 45 | ॐ ब्रह्मणे नमः Brahmaṇē | ब्रह्म स्वरूप |
| 46 | ॐ ऋतध्वजाय नमः Ṛtadhvajāya | ऋत (सत्य) ध्वजा वाले |
| 47 | ॐ लोकसाक्षिणे नमः Lōkasākṣiṇē | लोक के साक्षी |
| 48 | ॐ त्रिलोकेशाय नमः Trilōkēśāya | तीनों लोकों के ईश्वर |
| 49 | ॐ कर्मसाक्षिणे नमः Karmasākṣiṇē | कर्मों के साक्षी |
| 50 | ॐ जगत्पतये नमः Jagatpatayē | जगत के स्वामी |
| 51 | ॐ सूर्यनारायणाय नमः Sūryanārāyaṇāya | सूर्य रूपी नारायण |
| 52 | ॐ विभावसवे नमः Vibhāvasavē | तेजोमय अग्नि स्वरूप |
| 53 | ॐ अदिदेवाय नमः Adidēvāya | आदि देवता |
| 54 | ॐ दीप्तमूर्तये नमः Dīptamūrtayē | दीप्तिमान मूर्ति वाले |
| 55 | ॐ अरुणाय नमः Aruṇāya | अरुण (लाल) वर्ण वाले |
| 56 | ॐ ज्योतिषां पतये नमः Jyōtiṣāṁ Patayē | ज्योतियों के स्वामी |
| 57 | ॐ दिनाधीशाय नमः Dinādhīśāya | दिन के अधीश्वर |
| 58 | ॐ हरये नमः Harayē | पापों और अन्धकार को हरने वाले |
| 59 | ॐ ब्रह्माण्डविमोचकाय नमः Brahmāṇḍavimōcakāya | ब्रह्माण्ड को मुक्त करने वाले |
| 60 | ॐ हंसाय नमः Haṁsāya | परमहंस स्वरूप |
| 61 | ॐ आत्मने नमः Ātmanē | सर्वात्मा |
| 62 | ॐ सर्वात्मने नमः Sarvātmanē | सम्पूर्ण आत्म स्वरूप |
| 63 | ॐ ऋग्वेदपराक्रमाय नमः Ṛgvēdaparākramāya | ऋग्वेद में वर्णित पराक्रम वाले |
| 64 | ॐ गभस्तिमते नमः Gabhastimatē | किरणों से सम्पन्न |
| 65 | ॐ ऊर्ज्वलाय नमः Ūrjvalāya | प्रज्ज्वलित, दैदीप्यमान |
| 66 | ॐ वीराय नमः Vīrāya | वीर, पराक्रमी |
| 67 | ॐ निर्जराय नमः Nirjarāya | जरा-रहित, वृद्धत्व-रहित |
| 68 | ॐ जयाय नमः Jayāya | विजयी |
| 69 | ॐ अजयाय नमः Ajayāya | अजेय, अपराजित |
| 70 | ॐ सुखरूपिणे नमः Sukharūpiṇē | सुख स्वरूप |
| 71 | ॐ श्रीमते नमः Śrīmatē | श्री (ऐश्वर्य) से युक्त |
| 72 | ॐ सर्वलोकनमस्कृताय नमः Sarvalōkanamaskṛtāya | सभी लोकों द्वारा नमस्कृत |
| 73 | ॐ तेजोरूपाय नमः Tējōrūpāya | तेज स्वरूप |
| 74 | ॐ हिरण्यरेतसे नमः Hiraṇyarētasē | स्वर्ण बीज वाले |
| 75 | ॐ तमसः परे नमः Tamasaḥ Parē | अन्धकार से परे |
| 76 | ॐ पद्मिनीवल्लभाय नमः Padminīvallabhāya | कमलों के प्रिय |
| 77 | ॐ प्राणाय नमः Prāṇāya | प्राण स्वरूप |
| 78 | ॐ जगन्नाथाय नमः Jagannāthāya | जगत के नाथ |
| 79 | ॐ नभोगतये नमः Nabhōgatayē | आकाश में गति करने वाले |
| 80 | ॐ अव्ययाय नमः Avyayāya | अविनाशी |
| 81 | ॐ परमात्मने नमः Paramātmanē | परम आत्मा |
| 82 | ॐ चण्डरश्मये नमः Caṇḍaraśmayē | प्रचण्ड किरणों वाले |
| 83 | ॐ विश्वकर्मणे नमः Viśvakarmaṇē | विश्व के रचनाकार |
| 84 | ॐ विश्वरूपाय नमः Viśvarūpāya | विश्व स्वरूप |
| 85 | ॐ चराचरात्मने नमः Carācarātmanē | चर-अचर सबकी आत्मा |
| 86 | ॐ सूक्ष्मात्मने नमः Sūkṣmātmanē | सूक्ष्म आत्मा स्वरूप |
| 87 | ॐ गोपतये नमः Gōpatayē | किरणों (गौओं) के पति |
| 88 | ॐ ज्ञानघनाय नमः Jñānaghanāya | ज्ञान के पिण्ड |
| 89 | ॐ तापसप्रियाय नमः Tāpasapriyāya | तपस्वियों को प्रिय |
| 90 | ॐ उदयगिरिनाथाय नमः Udayagirinathāya | उदयाचल के स्वामी |
| 91 | ॐ सत्यानन्दस्वरूपिणे नमः Satyānandasvarūpiṇē | सत्य और आनन्द के स्वरूप |
| 92 | ॐ भक्तवत्सलाय नमः Bhaktavatsalāya | भक्तों पर कृपालु |
| 93 | ॐ ओजस्करणाय नमः Ōjaskaraṇāya | ओज (बल) उत्पन्न करने वाले |
| 94 | ॐ प्रद्युम्नाय नमः Pradyumnāya | अत्यन्त शक्तिशाली |
| 95 | ॐ वेदान्तसाराय नमः Vēdāntasārāya | वेदान्त के सार |
| 96 | ॐ सवितृमण्डलमध्यवर्तिने नमः Savitṛmaṇḍalamadhyavartinē | सूर्य मण्डल के मध्य में स्थित |
| 97 | ॐ अपराजिताय नमः Aparājitāya | अपराजित, कभी न हारने वाले |
| 98 | ॐ हरिताश्वाय नमः Haritāśvāya | हरित (स्वर्ण) अश्वों वाले |
| 99 | ॐ लोकरक्षकाय नमः Lōkarakṣakāya | लोक के रक्षक |
| 100 | ॐ सर्वोत्कृष्टाय नमः Sarvōtkṛṣṭāya | सबसे उत्कृष्ट |
| 101 | ॐ सूर्यमण्डलवासिने नमः Sūryamaṇḍalavāsinē | सूर्य मण्डल में निवास करने वाले |
| 102 | ॐ प्रचण्डाय नमः Pracaṇḍāya | प्रचण्ड, अत्यन्त तीव्र |
| 103 | ॐ काश्यपेयाय नमः Kāśyapēyāya | कश्यप के पुत्र |
| 104 | ॐ रथनायकाय नमः Rathanāyakāya | रथ के नायक |
| 105 | ॐ सर्वदेवस्तुताय नमः Sarvadēvastutāya | सभी देवताओं द्वारा स्तुत |
| 106 | ॐ अक्षयाय नमः Akṣayāya | अक्षय, कभी न क्षीण होने वाले |
| 107 | ॐ अनन्ताय नमः Anantāya | अनन्त, असीम |
| 108 | ॐ परमज्योतिषे नमः Paramajyōtiṣē | परम ज्योति स्वरूप |
पूजा विधि
1 Sankalpa (Intention)
(संकल्प)
Sankalpa (Intention)
(संकल्प)दाहिने हाथ में जल लेकर अपना नाम, गोत्र, तिथि और पूजा का संकल्प लें।
2 Dhyanam (Meditation)
(ध्यानम्)
Dhyanam (Meditation)
(ध्यानम्)आँखें बंद करके सात अश्वों वाले रथ पर विराजमान, स्वर्ण-तेज से प्रकाशमान भगवान सूर्य का ध्यान करें।
ध्येयः सदा सवितृमण्डलमध्यवर्ती नारायणः सरसिजासनसन्निविष्टः
Dhyeyah sada Savitrimandalamadhyavarti Narayanah sarasijasanasannivishtah
3 Avahana (Invocation)
(आवाहनम्)
Avahana (Invocation)
(आवाहनम्)हाथ जोड़कर पुष्प अर्पित करते हुए भगवान सूर्य का आवाहन करें।
ॐ श्री सूर्याय नमः। आवाहयामि।
4 Asana (Seat)
(आसनम्)
Asana (Seat)
(आसनम्)देवता को आसन (पुष्प/अक्षत) अर्पित करें।
ॐ श्री सूर्याय नमः। आसनं समर्पयामि।
5 Padya (Foot Wash)
(पाद्यम्)
Padya (Foot Wash)
(पाद्यम्)देवता के चरण धोने के लिए जल अर्पित करें।
ॐ श्री सूर्याय नमः। पाद्यं समर्पयामि।
6 Arghya (Offering)
(अर्घ्यम्)
Arghya (Offering)
(अर्घ्यम्)दोनों हाथों से सूर्य की ओर मुख करके कुमकुम और अक्षत मिश्रित जल का अर्घ्य दें।
ॐ श्री सूर्याय नमः। अर्घ्यं समर्पयामि।
7 Achamaniya (Sipping Water)
(आचमनीयम्)
Achamaniya (Sipping Water)
(आचमनीयम्)आचमन के लिए जल अर्पित करें।
ॐ श्री सूर्याय नमः। आचमनीयं समर्पयामि।
8 Snana (Bathing)
(स्नानम्)
Snana (Bathing)
(स्नानम्)सूर्य प्रतिमा को जल या पंचामृत से स्नान कराएं।
ॐ श्री सूर्याय नमः। स्नानं समर्पयामि।
9 Vastra (Clothing)
(वस्त्रम्)
Vastra (Clothing)
(वस्त्रम्)लाल या केसरिया वस्त्र अर्पित करें।
ॐ श्री सूर्याय नमः। वस्त्रं समर्पयामि।
10 Yajnopavita (Sacred Thread)
(यज्ञोपवीतम्) Optional
Yajnopavita (Sacred Thread)
(यज्ञोपवीतम्) Optionalयज्ञोपवीत (जनेऊ) अर्पित करें।
ॐ श्री सूर्याय नमः। यज्ञोपवीतं समर्पयामि।
11 Gandha (Sandalwood Paste)
(गन्धम्)
Gandha (Sandalwood Paste)
(गन्धम्)चन्दन या रक्त चन्दन का लेप लगाएं।
ॐ श्री सूर्याय नमः। गन्धं समर्पयामि।
12 Akshata (Unbroken Rice)
(अक्षताः)
Akshata (Unbroken Rice)
(अक्षताः)अक्षत (साबूत चावल) अर्पित करें।
ॐ श्री सूर्याय नमः। अक्षतान् समर्पयामि।
13 Pushpa (Flowers)
(पुष्पम्)
Pushpa (Flowers)
(पुष्पम्)लाल या नारंगी पुष्प, विशेषकर गेंदा और कमल अर्पित करें।
ॐ श्री सूर्याय नमः। पुष्पं समर्पयामि।
14 Dhupa (Incense)
(धूपम्)
Dhupa (Incense)
(धूपम्)अगरबत्ती या धूप जलाकर देवता के सम्मुख करें।
ॐ श्री सूर्याय नमः। धूपं आघ्रापयामि।
15 Deepa (Lamp)
(दीपम्)
Deepa (Lamp)
(दीपम्)घी या तेल का दीपक जलाकर देवता के सम्मुख करें।
ॐ श्री सूर्याय नमः। दीपं दर्शयामि।
16 Naivedya (Food Offering)
(नैवेद्यम्)
Naivedya (Food Offering)
(नैवेद्यम्)गुड़, गेहूं से बनी वस्तुएं और फल का नैवेद्य अर्पित करें।
ॐ श्री सूर्याय नमः। नैवेद्यं समर्पयामि।
17 Tambula (Betel Leaf)
(ताम्बूलम्) Optional
Tambula (Betel Leaf)
(ताम्बूलम्) Optionalपान और सुपारी अर्पित करें।
ॐ श्री सूर्याय नमः। ताम्बूलं समर्पयामि।
18 Dakshina (Offering)
(दक्षिणा) Optional
Dakshina (Offering)
(दक्षिणा) Optionalदक्षिणा स्वरूप सिक्का या अर्पण रखें।
19 108 Names Chanting
(नामार्चना)
108 Names Chanting
(नामार्चना)भगवान सूर्य के 108 नामों का जप करें, प्रत्येक नाम के साथ एक पुष्प या अक्षत अर्पित करें।
ॐ श्री सूर्याय नमः, ॐ आदित्याय नमः...
20 Concluding Prayer
(प्रार्थना)
Concluding Prayer
(प्रार्थना)अंत में प्रार्थना करें और देवता का आशीर्वाद माँगें।
21 Aarti
(आरती)
Aarti
(आरती)दीपक से आरती करें।
22 Pradakshina and Namaskara
(प्रदक्षिणा / नमस्कार)
Pradakshina and Namaskara
(प्रदक्षिणा / नमस्कार)देवता की परिक्रमा करें और साष्टांग नमस्कार करें।
23 Kshama Prarthana (Apology)
(क्षमा प्रार्थना)
Kshama Prarthana (Apology)
(क्षमा प्रार्थना)पूजा में हुई किसी भी त्रुटि के लिए क्षमा याचना करें।
मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर। यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु मे॥
Mantraheenam kriyaheenam bhaktiheenam Sureshwara, yat pujitam maya deva paripurnam tadastu me.
24 Visarjana (Send-off)
(विसर्जनम्) Optional
Visarjana (Send-off)
(विसर्जनम्) Optionalदेवता से विदाई की प्रार्थना करें, साथ ही हृदय में सदा विराजमान रहने की प्रार्थना करें।
ॐ श्री सूर्याय नमः। यथास्थानं प्रतिष्ठापयामि।
स्रोत: सूर्य सिद्धान्त, भविष्य पुराण एवं अन्य सौर ग्रन्थों से संकलित। विभिन्न स्रोतों में नामों के क्रम में अन्तर हो सकता है।
यह पाठ मुख्यतः सौर परम्परा एवं वैदिक उपासना पद्धति पर आधारित है।