साईं बाबा अष्टोत्तर शतनामावली
श्री साईं बाबा
परिचय
शिरडी साईं बाबा के 108 पवित्र नामों का संकलन। साईं बाबा सर्वधर्म समभाव, श्रद्धा और सबूरी (धैर्य) के प्रतीक हैं। प्रत्येक नाम उनके एक विशेष गुण, महिमा या उपदेश का बोध कराता है। इन नामों का श्रद्धापूर्वक जप करने से भक्त को साईं कृपा, शान्ति और भक्ति प्राप्त होती है।
महत्त्व
साईं अष्टोत्तर शतनामावली का पाठ साईं भक्तों के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण है। साईं बाबा ने श्रद्धा (विश्वास) और सबूरी (धैर्य) को भक्ति के दो स्तम्भ बताया। इन 108 नामों का जप करने से मानसिक शान्ति, कष्टों का निवारण और आध्यात्मिक उन्नति होती है।
कब पढ़ें
गुरुवार (साईं बाबा का विशेष दिन), साईं जयन्ती, साईं पुण्यतिथि (विजयदशमी), या किसी भी साईं पूजा के अवसर पर। प्रातःकाल या सन्ध्या काल में पाठ करना विशेष फलदायी माना जाता है।
लाभ
- • मानसिक शान्ति और चिन्ताओं का निवारण
- • कष्टों, रोगों और विपत्तियों से रक्षा
- • श्रद्धा और धैर्य में वृद्धि
- • साईं बाबा की विशेष कृपा और मार्गदर्शन
108 नाम
| # | मंत्र | अर्थ |
|---|---|---|
| 1 | ॐ साईनाथाय नमः Sāināthāya | साईं नाथ, साईं स्वामी |
| 2 | ॐ लक्ष्मीनारायणाय नमः Lakṣmīnārāyaṇāya | लक्ष्मीनारायण स्वरूप |
| 3 | ॐ कृष्णरामशिवमारुत्यादिरूपाय नमः Kṛṣṇarāmaśivamārutyādirūpāya | कृष्ण, राम, शिव, हनुमान आदि के स्वरूप |
| 4 | ॐ शेषशायिने नमः Śēṣaśāyinē | शेषनाग पर शयन करने वाले |
| 5 | ॐ गोदावरीतटशिरडीवासिने नमः Gōdāvarītaṭaśirḍīvāsinē | गोदावरी तट पर शिरडी में निवास करने वाले |
| 6 | ॐ भक्तहृदालयाय नमः Bhaktahṛdālayāya | भक्तों के हृदय में निवास करने वाले |
| 7 | ॐ सर्वहृन्निलयाय नमः Sarvahṛnnilayāya | सबके हृदय में विराजमान |
| 8 | ॐ भूतवासाय नमः Bhūtavāsāya | सभी प्राणियों में वास करने वाले |
| 9 | ॐ भूतभविष्यद्भाववर्जिताय नमः Bhūtabhaviṣyadbhāvavarjitāya | भूत, भविष्य और वर्तमान से परे |
| 10 | ॐ कालातीताय नमः Kālātītāya | काल से परे |
| 11 | ॐ कालाय नमः Kālāya | काल स्वरूप |
| 12 | ॐ कालकालाय नमः Kālakālāya | काल के भी काल |
| 13 | ॐ कालदर्पदमनाय नमः Kāladarpadamanāya | काल के दर्प को दमन करने वाले |
| 14 | ॐ मृत्युञ्जयाय नमः Mṛtyuñjayāya | मृत्यु को जीतने वाले |
| 15 | ॐ अमर्त्याय नमः Amartyāya | अमर, मृत्युरहित |
| 16 | ॐ मार्तण्डाय नमः Mārtaṇḍāya | तेजस्वी, प्रकाशमान |
| 17 | ॐ सर्वविदे नमः Sarvavidē | सब कुछ जानने वाले |
| 18 | ॐ सर्वान्तर्यामिने नमः Sarvāntaryāminē | सबके अन्तर्यामी |
| 19 | ॐ अनन्तकल्याणगुणाय नमः Anantakalyāṇaguṇāya | अनन्त कल्याणकारी गुणों वाले |
| 20 | ॐ अनन्तशक्तये नमः Anantaśaktayē | अनन्त शक्ति वाले |
| 21 | ॐ लीलामानुषविग्रहाय नमः Līlāmānuṣavigrahāya | लीला से मानव शरीर धारण करने वाले |
| 22 | ॐ सत्यव्रताय नमः Satyavratāya | सत्य के व्रती |
| 23 | ॐ सत्यधर्मपरायणाय नमः Satyadharmaparāyaṇāya | सत्य और धर्म के परायण |
| 24 | ॐ सद्गुरवे नमः Sadguravē | सद्गुरु |
| 25 | ॐ भक्तवत्सलाय नमः Bhaktavatsalāya | भक्तों पर कृपालु |
| 26 | ॐ भक्तावनसमर्थाय नमः Bhaktāvanasamarthāya | भक्तों की रक्षा में समर्थ |
| 27 | ॐ भक्तावनप्रतिज्ञाय नमः Bhaktāvanapratijñāya | भक्तों की रक्षा का प्रण लेने वाले |
| 28 | ॐ अन्नवस्त्रदाय नमः Annavastradāya | अन्न और वस्त्र देने वाले |
| 29 | ॐ आरोग्यक्षेमदाय नमः Ārōgyakṣēmadāya | आरोग्य और क्षेम देने वाले |
| 30 | ॐ सुखदाय नमः Sukhadāya | सुख देने वाले |
| 31 | ॐ श्रद्धासबूरीतत्पराय नमः Śraddhāsabūrītatparāya | श्रद्धा और सबूरी (धैर्य) के उपदेशक |
| 32 | ॐ शरणागतवत्सलाय नमः Śaraṇāgatavatsalāya | शरणागत पर कृपा करने वाले |
| 33 | ॐ भक्तिशक्तिप्रदाय नमः Bhaktiśaktipradāya | भक्ति और शक्ति प्रदान करने वाले |
| 34 | ॐ ज्ञानवैराग्यदाय नमः Jñānavairāgyadāya | ज्ञान और वैराग्य देने वाले |
| 35 | ॐ प्रेमप्रदाय नमः Prēmapradāya | प्रेम प्रदान करने वाले |
| 36 | ॐ संशयहृदयदौर्बल्यपापकर्मवासनाक्षयकराय नमः Saṁśayahṛdayadaurbalyapāpakarmavāsanākṣayakarāya | संशय, हृदय की दुर्बलता, पाप कर्म और वासनाओं का नाश करने वाले |
| 37 | ॐ हृदयग्रन्थिभेदकाय नमः Hṛdayagranthibhēdakāya | हृदय की गाँठ खोलने वाले |
| 38 | ॐ कर्मध्वंसिने नमः Karmadhvaṁsinē | कर्म-बन्धन को नष्ट करने वाले |
| 39 | ॐ शुद्धसत्त्वस्थिताय नमः Śuddhasattvasthitāya | शुद्ध सत्त्व में स्थित |
| 40 | ॐ गुणातीतगुणात्मने नमः Guṇātītaguṇātmanē | गुणों से परे फिर भी गुणात्मक |
| 41 | ॐ अनन्तकल्याणगुणात्मने नमः Anantakalyāṇaguṇātmanē | अनन्त कल्याणकारी गुणों के आत्मा |
| 42 | ॐ अव्यक्तरूपाय नमः Avyaktarūpāya | अव्यक्त स्वरूप |
| 43 | ॐ अचिन्त्याय नमः Acintyāya | चिन्तन से परे |
| 44 | ॐ सूक्ष्माय नमः Sūkṣmāya | सूक्ष्म स्वरूप |
| 45 | ॐ सर्वान्तर्गताय नमः Sarvāntargatāya | सबके भीतर विद्यमान |
| 46 | ॐ सत्चिदानन्दाय नमः Saccidānandāya | सत्-चित्-आनन्द स्वरूप |
| 47 | ॐ नित्यानन्दाय नमः Nityānandāya | नित्य आनन्द स्वरूप |
| 48 | ॐ परमशान्ताय नमः Paramaśāntāya | परम शान्त |
| 49 | ॐ द्वारकामायिवासिने नमः Dvārakāmāyivāsinē | द्वारकामाई में निवास करने वाले |
| 50 | ॐ धुनीमान्ताय नमः Dhunīmāntāya | धुनी (पवित्र अग्नि) रखने वाले |
| 51 | ॐ ऊदीप्रसादकाय नमः Ūdīprasādakāya | ऊदी (विभूति) प्रसाद देने वाले |
| 52 | ॐ समदृष्टये नमः Samadṛṣṭayē | सबको समान दृष्टि से देखने वाले |
| 53 | ॐ दयासागराय नमः Dayāsāgarāya | दया के सागर |
| 54 | ॐ कृपानिधये नमः Kṛpānidhayē | कृपा के भण्डार |
| 55 | ॐ करुणासागराय नमः Karuṇāsāgarāya | करुणा के सागर |
| 56 | ॐ सर्वहितोपदेशकाय नमः Sarvahitōpadēśakāya | सबके हित का उपदेश देने वाले |
| 57 | ॐ सर्वमतसम्मताय नमः Sarvamatsammatāya | सभी मतों द्वारा सम्मानित |
| 58 | ॐ सर्वधर्मसम्भावनाय नमः Sarvadharmasambhāvanāya | सभी धर्मों का सम्मान करने वाले |
| 59 | ॐ फकीराय नमः Phakīrāya | दिव्य फकीर |
| 60 | ॐ सत्पुरुषाय नमः Satpuruṣāya | सत्पुरुष, सन्त |
| 61 | ॐ अवतारमूर्तये नमः Avatāramūrtayē | अवतार मूर्ति |
| 62 | ॐ योगीश्वराय नमः Yōgīśvarāya | योगियों के ईश्वर |
| 63 | ॐ महात्मने नमः Mahātmanē | महान आत्मा |
| 64 | ॐ परमदयालवे नमः Paramadayālavē | परम दयालु |
| 65 | ॐ देवदेवाय नमः Dēvadēvāya | देवों के देव |
| 66 | ॐ दीनबन्धवे नमः Dīnabandhavē | दीनों के बन्धु |
| 67 | ॐ अनाथनाथाय नमः Anāthanāthāya | अनाथों के नाथ |
| 68 | ॐ अर्थिकल्पतरवे नमः Arthikalpataravē | याचकों के कल्पवृक्ष |
| 69 | ॐ आपद्बान्धवाय नमः Āpadbāndhavāya | आपत्ति में बन्धु |
| 70 | ॐ मार्गदर्शकाय नमः Mārgadarśakāya | मार्गदर्शक |
| 71 | ॐ सत्संगप्रियाय नमः Satsaṅgapriyāya | सत्संग प्रिय |
| 72 | ॐ पापविमोचनाय नमः Pāpavimōcanāya | पापों से मुक्त करने वाले |
| 73 | ॐ हृदयशुद्धिकराय नमः Hṛdayaśuddhikarāya | हृदय को शुद्ध करने वाले |
| 74 | ॐ सबूरीप्रसन्नाय नमः Sabūrīprasannāya | सबूरी (धैर्य) से प्रसन्न होने वाले |
| 75 | ॐ श्रद्धाप्रसन्नाय नमः Śraddhāprasannāya | श्रद्धा से प्रसन्न होने वाले |
| 76 | ॐ सन्तवरिष्ठाय नमः Santavariṣṭhāya | सन्तों में श्रेष्ठ |
| 77 | ॐ सत्यनारायणाय नमः Satyanārāyaṇāya | सत्यनारायण स्वरूप |
| 78 | ॐ वैकुण्ठवासिने नमः Vaikuṇṭhavāsinē | वैकुण्ठ में निवास करने वाले |
| 79 | ॐ सुरनिवासाय नमः Suranivāsāya | देवताओं के निवास स्थान |
| 80 | ॐ चिदाकाशाय नमः Cidākāśāya | चैतन्य आकाश स्वरूप |
| 81 | ॐ अचलाय नमः Acalāya | अचल, स्थिर |
| 82 | ॐ अव्ययाय नमः Avyayāya | अविनाशी |
| 83 | ॐ अनन्ताय नमः Anantāya | अनन्त, असीम |
| 84 | ॐ सर्वशक्तिमूर्तये नमः Sarvaśaktimūrtayē | सम्पूर्ण शक्ति स्वरूप |
| 85 | ॐ सर्वमङ्गलकराय नमः Sarvamaṅgalakarāya | सम्पूर्ण मंगल करने वाले |
| 86 | ॐ परमेश्वराय नमः Paramēśvarāya | सर्वोच्च ईश्वर |
| 87 | ॐ रोगनिवारणाय नमः Rōganivāraṇāya | रोगों को दूर करने वाले |
| 88 | ॐ भाग्यवर्धनाय नमः Bhāgyavardhanāya | भाग्य बढ़ाने वाले |
| 89 | ॐ दुःखनिवारणाय नमः Duḥkhanivāraṇāya | दुःख दूर करने वाले |
| 90 | ॐ पुण्यश्रवणकीर्तनाय नमः Puṇyaśravaṇakīrtanāya | जिनका श्रवण और कीर्तन पुण्यदायक है |
| 91 | ॐ तीर्थाय नमः Tīrthāya | स्वयं तीर्थ स्वरूप |
| 92 | ॐ वासुदेवाय नमः Vāsudēvāya | सर्वव्यापी देव |
| 93 | ॐ सत्यसंकल्पाय नमः Satyasaṅkalpāya | सत्य संकल्प वाले |
| 94 | ॐ योगक्षेमवहाय नमः Yōgakṣēmavahāya | योगक्षेम (प्राप्ति और रक्षा) वहन करने वाले |
| 95 | ॐ अतिथिप्रियाय नमः Atithipriyāya | अतिथि प्रिय |
| 96 | ॐ सत्परायणाय नमः Satparāyaṇāya | सत्य के परायण |
| 97 | ॐ लोकनाथाय नमः Lōkanāthāya | लोक के नाथ |
| 98 | ॐ सर्वजीवहिताय नमः Sarvajīvahitāya | सभी जीवों का हित चाहने वाले |
| 99 | ॐ विश्वमित्राय नमः Viśvamitrāya | विश्व के मित्र |
| 100 | ॐ सर्वव्यापिने नमः Sarvavyāpinē | सर्वव्यापी |
| 101 | ॐ आत्मनिवेदनप्रियाय नमः Ātmanivēdanapriyāya | आत्म-समर्पण से प्रसन्न होने वाले |
| 102 | ॐ निष्कामकर्मिणे नमः Niṣkāmakarmiṇē | निष्काम कर्म करने वाले |
| 103 | ॐ सदाशिवाय नमः Sadāśivāya | सदा कल्याणकारी |
| 104 | ॐ चित्स्वरूपाय नमः Citsvarūpāya | चैतन्य स्वरूप |
| 105 | ॐ अपरिच्छिन्नाय नमः Aparicchinnāya | असीम, अविभाज्य |
| 106 | ॐ ज्ञानस्वरूपिणे नमः Jñānasvarūpiṇē | ज्ञान स्वरूप |
| 107 | ॐ भक्तसमर्थसद्गुरुसाईनाथाय नमः Bhaktasamarthasadgurusāināthāya | भक्तों के समर्थ सद्गुरु साईनाथ |
| 108 | ॐ श्रीसाईनाथमहाराजाय नमः Śrīsāināthamahārājāya | श्री साईनाथ महाराज |
पूजा विधि
1 Sankalpa (Intention)
(संकल्प)
Sankalpa (Intention)
(संकल्प)दाहिने हाथ में जल लेकर अपना नाम, गोत्र, तिथि और पूजा का संकल्प लें।
2 Dhyanam (Meditation)
(ध्यानम्)
Dhyanam (Meditation)
(ध्यानम्)आँखें बंद करके द्वारकामाई में पत्थर पर विराजमान, दाहिने हाथ से आशीर्वाद देते हुए शिरडी साईं बाबा का ध्यान करें।
सदा सत्स्वरूपं चिदानन्दकन्दं जगत्सम्भवस्थानसंहारहेतुम्
Sada satsvarupam chidanandakandam jagatsambhavasthanasamharahetum
3 Avahana (Invocation)
(आवाहनम्)
Avahana (Invocation)
(आवाहनम्)हाथ जोड़कर पुष्प अर्पित करते हुए साईं बाबा का आवाहन करें।
ॐ श्री साईनाथाय नमः। आवाहयामि।
4 Asana (Seat)
(आसनम्)
Asana (Seat)
(आसनम्)देवता को आसन (पुष्प/अक्षत) अर्पित करें।
ॐ श्री साईनाथाय नमः। आसनं समर्पयामि।
5 Padya (Foot Wash)
(पाद्यम्)
Padya (Foot Wash)
(पाद्यम्)देवता के चरण धोने के लिए जल अर्पित करें।
ॐ श्री साईनाथाय नमः। पाद्यं समर्पयामि।
6 Arghya (Offering)
(अर्घ्यम्)
Arghya (Offering)
(अर्घ्यम्)दोनों हाथों से कुमकुम और अक्षत मिश्रित जल का अर्घ्य दें।
ॐ श्री साईनाथाय नमः। अर्घ्यं समर्पयामि।
7 Achamaniya (Sipping Water)
(आचमनीयम्)
Achamaniya (Sipping Water)
(आचमनीयम्)आचमन के लिए जल अर्पित करें।
ॐ श्री साईनाथाय नमः। आचमनीयं समर्पयामि।
8 Snana (Bathing)
(स्नानम्)
Snana (Bathing)
(स्नानम्)साईं बाबा प्रतिमा को जल या पंचामृत से स्नान कराएं।
ॐ श्री साईनाथाय नमः। स्नानं समर्पयामि।
9 Vastra (Clothing)
(वस्त्रम्)
Vastra (Clothing)
(वस्त्रम्)वस्त्र अर्पित करें।
ॐ श्री साईनाथाय नमः। वस्त्रं समर्पयामि।
10 Yajnopavita (Sacred Thread)
(यज्ञोपवीतम्) Optional
Yajnopavita (Sacred Thread)
(यज्ञोपवीतम्) Optionalयज्ञोपवीत (जनेऊ) अर्पित करें।
ॐ श्री साईनाथाय नमः। यज्ञोपवीतं समर्पयामि।
11 Gandha (Sandalwood Paste)
(गन्धम्)
Gandha (Sandalwood Paste)
(गन्धम्)चन्दन या कुमकुम का लेप लगाएं।
ॐ श्री साईनाथाय नमः। गन्धं समर्पयामि।
12 Akshata (Unbroken Rice)
(अक्षताः)
Akshata (Unbroken Rice)
(अक्षताः)अक्षत (साबूत चावल) अर्पित करें।
ॐ श्री साईनाथाय नमः। अक्षतान् समर्पयामि।
13 Pushpa (Flowers)
(पुष्पम्)
Pushpa (Flowers)
(पुष्पम्)पुष्प अर्पित करें, विशेषकर गेंदा और चमेली के पुष्प।
ॐ श्री साईनाथाय नमः। पुष्पं समर्पयामि।
14 Dhupa (Incense)
(धूपम्)
Dhupa (Incense)
(धूपम्)अगरबत्ती या धूप जलाकर देवता के सम्मुख करें।
ॐ श्री साईनाथाय नमः। धूपं आघ्रापयामि।
15 Deepa (Lamp)
(दीपम्)
Deepa (Lamp)
(दीपम्)घी या तेल का दीपक जलाकर देवता के सम्मुख करें।
ॐ श्री साईनाथाय नमः। दीपं दर्शयामि।
16 Naivedya (Food Offering)
(नैवेद्यम्)
Naivedya (Food Offering)
(नैवेद्यम्)फल, मिठाई या भोजन का नैवेद्य अर्पित करें। साईं बाबा सभी समुदायों का भोजन स्वीकार करते थे।
ॐ श्री साईनाथाय नमः। नैवेद्यं समर्पयामि।
17 Tambula (Betel Leaf)
(ताम्बूलम्) Optional
Tambula (Betel Leaf)
(ताम्बूलम्) Optionalपान और सुपारी अर्पित करें।
ॐ श्री साईनाथाय नमः। ताम्बूलं समर्पयामि।
18 Dakshina (Offering)
(दक्षिणा) Optional
Dakshina (Offering)
(दक्षिणा) Optionalदक्षिणा स्वरूप सिक्का या अर्पण रखें। साईं बाबा दक्षिणा को आध्यात्मिक साधना के रूप में माँगते थे।
19 108 Names Chanting
(नामार्चना)
108 Names Chanting
(नामार्चना)साईं बाबा के 108 नामों का जप करें, प्रत्येक नाम के साथ एक पुष्प या अक्षत अर्पित करें।
ॐ साईनाथाय नमः, ॐ लक्ष्मीनारायणाय नमः...
20 Concluding Prayer
(प्रार्थना)
Concluding Prayer
(प्रार्थना)अंत में प्रार्थना करें और साईं बाबा का आशीर्वाद माँगें।
21 Aarti
(आरती)
Aarti
(आरती)दीपक से आरती करें। साईं बाबा की आरती शिरडी संस्थान की पद्धति से करें।
22 Pradakshina and Namaskara
(प्रदक्षिणा / नमस्कार)
Pradakshina and Namaskara
(प्रदक्षिणा / नमस्कार)देवता की परिक्रमा करें और साष्टांग नमस्कार करें।
23 Kshama Prarthana (Apology)
(क्षमा प्रार्थना)
Kshama Prarthana (Apology)
(क्षमा प्रार्थना)पूजा में हुई किसी भी त्रुटि के लिए क्षमा याचना करें।
मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर। यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु मे॥
Mantraheenam kriyaheenam bhaktiheenam Sureshwara, yat pujitam maya deva paripurnam tadastu me.
24 Visarjana (Send-off)
(विसर्जनम्) Optional
Visarjana (Send-off)
(विसर्जनम्) Optionalदेवता से विदाई की प्रार्थना करें, साथ ही हृदय में सदा विराजमान रहने की प्रार्थना करें।
ॐ श्री साईनाथाय नमः। यथास्थानं प्रतिष्ठापयामि।
स्रोत: साईं सत्चरित्र, भक्त परम्परा एवं शिरडी साईं संस्थान से प्रचलित नामावली से संकलित। विभिन्न स्रोतों में नामों के क्रम में अन्तर हो सकता है।
यह पाठ भक्ति परम्परा और शिरडी साईं बाबा की शिक्षाओं पर आधारित है।