जय काली जगदम्ब जय, हरनि ओघ अघ पुंज।
वास करहु निज दास के, निशदिन हृदय निकुंज॥
अर्थ जगदम्बा काली की जय हो, पापों के समूह को हरने वाली। अपने दास के हृदय रूपी निकुंज में रात-दिन निवास करो।
जयति कपाली कालिका, कंकाली सुख दानि।
कृपा करहु वरदायिनी, निज सेवक अनुमानि॥
अर्थ कपालधारिणी कालिका की जय हो, कंकाली, सुख देने वाली। हे वरदायिनी, अपना सेवक जानकर कृपा करो।
जय जय जय काली कंकाली।
जय कपालिनी, जयति कराली॥
अर्थ काली और कंकाली की जय-जय हो। कपालिनी की जय, कराली (भयंकर रूप वाली) की जय हो।
शंकर प्रिया, अपर्णा, अम्बा।
जय कपर्दिनी, जय जगदम्बा॥
अर्थ शंकर की प्रिया, अपर्णा, अम्बा। कपर्दिनी की जय, जगदम्बा की जय हो।
आर्या, हला, अम्बिका, माया।
कात्यायनी उमा जगजाया॥
अर्थ आर्या, हला, अम्बिका, माया। कात्यायनी, उमा और जगत की जननी।
गिरिजा गौरी दुर्गा चण्डी।
दाक्षाणायिनी शाम्भवी प्रचंडी॥
अर्थ गिरिजा, गौरी, दुर्गा, चण्डी। दक्ष की पुत्री, शाम्भवी और प्रचण्ड स्वरूप वाली।
पार्वती मंगला भवानी।
विश्वकारिणी सती मृडानी॥
अर्थ पार्वती, मंगला, भवानी। विश्व की रचना करने वाली, सती और मृडानी।
सर्वमंगला शैल नन्दिनी।
हेमवती तुम जगत वन्दिनी॥
अर्थ सर्वमंगला, पर्वत राज की पुत्री। हेमवती — तुम जगत की वन्दनीय हो।
ब्रह्मचारिणी कालरात्रि जय।
महारात्रि जय मोहरात्रि जय॥
अर्थ ब्रह्मचारिणी की जय, कालरात्रि की जय। महारात्रि की जय, मोहरात्रि की जय।
तुम त्रिमूर्ति रोहिणी कालिका।
कूष्माण्डा कार्तिका चण्डिका॥
अर्थ तुम त्रिमूर्ति हो, रोहिणी और कालिका। कूष्माण्डा, कार्तिका और चण्डिका।
तारा भुवनेश्वरी अनन्या।
तुम्हीं छिन्नमस्ता शुचिधन्या॥
अर्थ तारा, भुवनेश्वरी और अनन्या। तुम्हीं छिन्नमस्ता हो, पवित्र और धन्य।
धूमावती षोडशी माता।
बगला मातंगी विख्याता॥
अर्थ धूमावती और षोडशी माता। बगलामुखी और मातंगी — सब विख्यात हैं।
तुम भैरवी मातु तुम कमला।
रक्तदन्तिका कीरति अमला॥
अर्थ तुम भैरवी हो माता, तुम कमला हो। रक्तदन्तिका — तुम्हारी कीर्ति निर्मल है।
शाकम्भरी कौशिकी भीमा।
महातमा अग जग की सीमा॥
अर्थ शाकम्भरी, कौशिकी और भीमा। महान आत्मा, चर-अचर जगत की सीमा।
चन्द्रघण्टिका तुम सावित्री।
ब्रह्मवादिनी मां गायत्री॥
अर्थ चन्द्रघण्टा तुम हो, सावित्री। ब्रह्मवादिनी माँ गायत्री तुम हो।
रूद्राणी तुम कृष्ण पिंगला।
अग्निज्वाला तुम सर्वमंगला॥
अर्थ रूद्राणी तुम हो, कृष्ण पिंगला। अग्निज्वाला और सर्वमंगला तुम हो।
मेघस्वना तपस्विनि योगिनी।
सहस्राक्षि तुम अगजग भोगिनी॥
अर्थ मेघ के समान स्वर वाली, तपस्विनी, योगिनी। सहस्र नेत्रों वाली, चर-अचर जगत को भोगने वाली।
जलोदरी सरस्वती डाकिनी।
त्रिदशेश्वरी अजेय लाकिनी॥
अर्थ जलोदरी, सरस्वती, डाकिनी। तैंतीस देवों की ईश्वरी, अजेय लाकिनी।
पुष्टि तुष्टि धृति स्मृति शिव दूती।
कामाक्षी लज्जा आहूती॥
अर्थ पुष्टि, तुष्टि, धृति, स्मृति और शिवदूती। कामाक्षी, लज्जा और आहुति तुम हो।
महोदरी कामाक्षि हारिणी।
विनायकी श्रुति महा शाकिनी॥
अर्थ महोदरी, कामाक्षी, हारिणी। विनायकी, श्रुति और महाशाकिनी।
अजा कर्ममोही ब्रह्माणी।
धात्री वाराही शर्वाणी॥
अर्थ अजा, कर्ममोहिनी, ब्रह्माणी। धात्री, वाराही और शर्वाणी।
स्कन्द मातु तुम सिंह वाहिनी।
मातु सुभद्रा रहहु दाहिनी॥
अर्थ स्कन्द (कार्तिकेय) की माता, सिंह पर सवार। हे माता सुभद्रा, सदा दाहिनी ओर रहो।
नाम रूप गुण अमित तुम्हारे।
शेष शारदा बरणत हारे॥
अर्थ तुम्हारे नाम, रूप और गुण अनन्त हैं। शेषनाग और शारदा भी वर्णन करते थक गए।
तनु छवि श्यामवर्ण तव माता।
नाम कालिका जग विख्याता॥
अर्थ हे माता, तुम्हारे शरीर की छवि श्यामवर्ण है। कालिका नाम से जगत में विख्यात हो।
अष्टादश तब भुजा मनोहर।
तिनमहँ अस्त्र विराजत सुन्दर॥
अर्थ तुम्हारी अठारह भुजाएँ मनोहर हैं। उनमें सुन्दर अस्त्र विराजमान हैं।
शंख चक्र अरू गदा सुहावन।
परिघ भुशण्डी घण्टा पावन॥
अर्थ शंख, चक्र और सुन्दर गदा। परिघ, भुशुण्डी और पवित्र घण्टा।
शूल बज्र धनुबाण उठाए।
निशिचर कुल सब मारि गिराए॥
अर्थ शूल, वज्र, धनुष-बाण उठाए। राक्षस कुल को सब मारकर गिरा दिया।
शुंभ निशुंभ दैत्य संहारे।
रक्तबीज के प्राण निकारे॥
अर्थ शुम्भ-निशुम्भ दैत्यों का संहार किया। रक्तबीज के प्राण निकाल दिए।
चौंसठ योगिनी नाचत संगा।
मद्यपान कीन्हैउ रण गंगा॥
अर्थ चौंसठ योगिनियाँ संग में नाचती हैं। रणभूमि में रक्त की गंगा बहाकर मद्यपान किया।
कटि किंकिणी मधुर नूपुर धुनि।
दैत्यवंश कांपत जेहि सुनि-सुनि॥
अर्थ कमर की किंकिणी और मधुर नूपुर की ध्वनि। जिसे सुन-सुनकर दैत्यवंश काँपता है।
कर खप्पर त्रिशूल भयकारी।
अहै सदा सन्तन सुखकारी॥
अर्थ हाथ में खप्पर और भयकारी त्रिशूल है। सन्तों को सदा सुख देने वाली हैं।
शव आरूढ़ नृत्य तुम साजा।
बजत मृदंग भेरी के बाजा॥
अर्थ शव पर आरूढ़ होकर नृत्य सजाया। मृदंग और भेरी के बाजे बज रहे हैं।
रक्त पान अरिदल को कीन्हा।
प्राण तजेउ जो तुम्हिं न चीन्हा॥
अर्थ शत्रु दल का रक्तपान किया। जिसने तुम्हें नहीं पहचाना, उसने प्राण त्याग दिए।
लपलपाति जिव्हा तव माता।
भक्तन सुख दुष्टन दुःख दाता॥
अर्थ हे माता, तुम्हारी जीभ लपलपाती है। भक्तों को सुख और दुष्टों को दुख देने वाली।
लसत भाल सेंदुर को टीको।
बिखरे केश रूप अति नीको॥
अर्थ ललाट पर सिन्दूर का टीका शोभित है। बिखरे केश — रूप अत्यन्त सुन्दर है।
मुंडमाल गल अतिशय सोहत।
भुजामल किंकण मनमोहन॥
अर्थ गले में मुण्डमाला अत्यन्त शोभित है। भुजाओं में कंगन मनमोहक हैं।
प्रलय नृत्य तुम करहु भवानी।
जगदम्बा कहि वेद बखानी॥
अर्थ हे भवानी, तुम प्रलय नृत्य करती हो। वेदों ने तुम्हें जगदम्बा कहकर बखाना है।
तुम मशान वासिनी कराला।
भजत तुरत काटहु भवजाला॥
अर्थ तुम श्मशान में निवास करने वाली भयंकर हो। भजन करते ही तुरन्त संसार का जाल काट देती हो।
बावन शक्ति पीठ तव सुन्दर।
जहाँ बिराजत विविध रूप धर॥
अर्थ बावन शक्तिपीठ तुम्हारे सुन्दर हैं। जहाँ विविध रूप धारण करके विराजती हो।
विन्धवासिनी कहूँ बड़ाई।
कहँ कालिका रूप सुहाई॥
अर्थ विन्ध्यवासिनी कहूँ या बड़ाई कहूँ। कहीं कालिका का सुन्दर रूप है।
शाकम्भरी बनी कहँ ज्वाला।
महिषासुर मर्दिनी कराला॥
अर्थ कहीं शाकम्भरी बनी, कहीं ज्वाला। महिषासुर मर्दिनी भयंकर रूप वाली।
कामाख्या तव नाम मनोहर।
पुजवहिं मनोकामना द्रुततर॥
अर्थ कामाख्या तुम्हारा मनोहर नाम है। पूजन से मनोकामना शीघ्र पूर्ण होती है।
चंड मुंड वध छिन महं करेउ।
देवन के उर आनन्द भरेउ॥
अर्थ चण्ड-मुण्ड का वध क्षण में कर दिया। देवताओं के हृदय में आनन्द भर दिया।
सर्व व्यापिनी तुम माँ तारा।
अरिदल दलन लेहु अवतारा॥
अर्थ हे माँ तारा, तुम सर्वव्यापिनी हो। शत्रु दल का दलन करने को अवतार लेती हो।
खलबल मचत सुनत हुँकारी।
अगजग व्यापक देह तुम्हारी॥
अर्थ तुम्हारी हुँकार सुनकर खलबली मच जाती है। चर-अचर जगत में तुम्हारी देह व्याप्त है।
तुम विराट रूपा गुणखानी।
विश्व स्वरूपा तुम महारानी॥
अर्थ तुम विराट रूप वाली और गुणों की खान हो। विश्व स्वरूपा तुम महारानी हो।
उत्पत्ति स्थिति लय तुम्हरे कारण।
करहु दास के दोष निवारण॥
अर्थ उत्पत्ति, स्थिति और लय (सृष्टि, पालन, संहार) तुम्हारे कारण है। दास के दोषों का निवारण करो।
माँ उर वास करहू तुम अंबा।
सदा दीन जन की अवलंबा॥
अर्थ हे अम्बा माँ, हृदय में निवास करो। तुम सदा दीन जनों की अवलम्ब (सहारा) हो।
तुम्हारो ध्यान धरै जो कोई।
ता कहँ भीति कतहुँ नहिं होई॥
अर्थ जो कोई तुम्हारा ध्यान करता है, उसे कहीं भी भय नहीं होता।
विश्वरूप तुम आदि भवानी।
महिमा वेद पुराण बखानी॥
अर्थ विश्वरूपा तुम आदि भवानी हो। वेद और पुराणों ने तुम्हारी महिमा बखानी है।
अति अपार तव नाम प्रभावा।
जपत न रहन रंच दुःख दावा॥
अर्थ तुम्हारे नाम का प्रभाव अत्यन्त अपार है। जपने से रंचमात्र भी दुख का दावा (ताप) नहीं रहता।
महाकालिका जय कल्याणी।
जयति सदा सेवक सुखदानी॥
अर्थ महाकालिका की जय, कल्याणी की जय। सदा सेवकों को सुख देने वाली की जय हो।
तुम अनन्त औदार्य विभूषण।
कीजिए कृपा क्षमिये सब दूषण॥
अर्थ तुम अनन्त उदारता से विभूषित हो। कृपा कीजिए और सब दोष क्षमा कीजिए।
दास जानि निज दया दिखावहु।
सुत अनुमानित सहित अपनावहु॥
अर्थ अपना दास जानकर दया दिखाओ। पुत्र समझकर सहित अपनाओ।
जननी तुम सेवक प्रति पाली।
करहु कृपा सब विधि माँ काली॥
अर्थ हे जननी, तुम सेवक का पालन करो। हे माँ काली, सब प्रकार से कृपा करो।
पाठ करै चालीसा जोई।
तापर कृपा तुम्हारी होई॥
अर्थ जो कोई इस चालीसा का पाठ करे, उस पर तुम्हारी कृपा होती है।
जय तारा, जय दक्षिणा, कलावती सुखमूल।
शरणागत 'भक्त' है, रहहु सदा अनुकूल॥
अर्थ तारा की जय, दक्षिणा की जय, कलावती और सुखमूल। शरणागत भक्त है, सदा अनुकूल रहो।