हनुमान मंत्र
आकार
प्रदर्शन
ॐ हनुमते नमः
ॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि।
तन्नो हनुमत् प्रचोदयात्॥
ॐ हनुमते नमः
एआई अनुवाद
शब्दार्थ
ॐ परम पवित्र ध्वनि
हनुमते हनुमान को (जिनकी हनु/ठोड़ी टूटी हुई है) dative singular of Hanumat
नमः नमन, प्रणाम
ॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि।
तन्नो हनुमत् प्रचोदयात्॥
एआई अनुवाद
शब्दार्थ
ॐ परम पवित्र ध्वनि
आञ्जनेयाय अंजनी के पुत्र (हनुमान) को dative singular of Āñjaneya
विद्महे हम जानते हैं 1st person plural present of 'vid' (to know)
वायुपुत्राय वायु के पुत्र को dative singular, compound of Vāyu + putra
धीमहि हम ध्यान करते हैं 1st person plural, Gayatri form of 'dhī' (to meditate)
तत् वह demonstrative pronoun
नः हमें, हमारे accusative/genitive plural of 'asmad'
हनुमत् हनुमान nominative singular
प्रचोदयात् प्रेरित करें, प्रकाशित करें causative optative 3rd person singular of 'pra-cud'
अर्थ
हनुमान मंत्र भगवान हनुमान को समर्पित हैं, जो शक्ति, साहस, भक्ति और सेवा के प्रतीक हैं। हनुमान जी भगवान राम के परम भक्त और वायुपुत्र हैं। इन्हें चिरंजीवी (अमर) माना जाता है।
“ॐ हनुमते नमः” हनुमान जी का मूल मंत्र है। हनुमान गायत्री मंत्र गायत्री छंद में रचित एक शक्तिशाली मंत्र है जो हनुमान जी से शक्ति और बुद्धि की प्रार्थना करता है।
लाभ
- भय निवारण: सभी प्रकार के भय और संकटों से मुक्ति
- शक्ति प्राप्ति: शारीरिक और मानसिक शक्ति में वृद्धि
- साहस वृद्धि: कठिन परिस्थितियों में साहस और धैर्य मिलता है
- बुरी शक्तियों से रक्षा: नकारात्मक शक्तियों और बुरी नज़र से सुरक्षा
- रोग निवारण: शारीरिक रोगों से मुक्ति
- भक्ति वृद्धि: श्रीराम के प्रति भक्ति भाव जागृत होता है
जप विधि
- मंगलवार और शनिवार को जप करना विशेष लाभकारी है
- हनुमान जयंती पर जप विशेष फलदायी है
- 108 बार या 11 बार जप करें
- लाल रंग के आसन पर बैठकर जप करें
- सिंदूर और चमेली के तेल का दीपक जलाकर जप करें
- जप करते समय हनुमान जी के वीर स्वरूप का ध्यान करें
- ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए जप करना अधिक फलदायी है
जप गणक
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