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वेद पथ

श्री कृष्ण आरती - आरती कुंजबिहारी की

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परिचय

“आरती कुंजबिहारी की” भगवान श्री कृष्ण की सबसे प्रसिद्ध और लोकप्रिय आरती है। इस आरती की रचना महान भक्त कवि सूरदास जी ने की थी। इसमें श्री कृष्ण के मनमोहक रूप, उनकी बांसुरी वादन लीला और गोपियों के साथ रास लीला का सुंदर वर्णन किया गया है। कुंजबिहारी का अर्थ है कुंजों (वृंदावन के बागों) में विहार करने वाले।

आरती का महत्व

कृष्ण आरती का विशेष महत्व है क्योंकि भगवान कृष्ण को पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान माना जाता है। इस आरती में उनके मनमोहक स्वरूप का ऐसा वर्णन है कि भक्त का मन कृष्ण प्रेम में डूब जाता है। जन्माष्टमी पर इस आरती का विशेष महत्व है। गिरिधर कृष्ण मुरारी के रूप में उनकी स्तुति से भक्तों को सुख और शांति प्राप्त होती है।

आरती करने की विधि

  1. श्री कृष्ण की प्रतिमा या चित्र के सामने घी का दीपक जलाएं
  2. तुलसी दल, मक्खन, मिश्री और फूल अर्पित करें
  3. आरती गाते हुए थाली को कृष्ण जी के सामने घड़ी की दिशा में घुमाएं
  4. जन्माष्टमी की रात्रि को यह आरती करना अत्यंत शुभ है
  5. प्रसाद के रूप में माखन-मिश्री, पंचामृत या धनिया-पंजीरी अर्पित करें

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